बगुला भगत/Bagula Bhagat-Panchtantra/2020

 

बगुला भगत/Bagula Bhagat-Panchtantra/2020
बगुला भगत/Bagula Bhagat-Panchtantra/2020

बगुला भगत/Bagula Bhagat-Panchtantra/2020

एक जंगल में बहुत विशाल तालाब  था  जो पानी से हमेशा भरा रहता था   इसमें हर प्रकार के जीवों के लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध थी  उसने अनेक प्रकार के जीव जंतु मछलियां पक्षी कछुए और केकड़े रहते थे  तालाब के पास में ही एक बगुला रहता था जो बहुत आलसी  स्वभाव का था  परिश्रम करना उसको बिल्कुल भी पसंद नहीं था वह अक्सर भूखा ही रहता था  जिसके कारण उसका शरीर भी कमजोर हो गया था मछली पकड़ने में तो मेहनत लगती है लेकिन वह आलसी स्वभाव होने के कारण मछली का शिकार नहीं करता था  वह अक्सर इसी सोच विचार में डूबा रहता था कि क्या उपाय किया जाए जिससे उसे बिना मेहनत किए ही स्वादिष्ट भोजन  मिलता रहे एक दिन उसे एक उपाय सोचा और  वह उसे आजमाने बैठ गया

बगुला तालाब के किनारे खड़ा हो गया और आंखों से आंसू बहाना  शुरू  कर दिया एक केकड़े ने उसे देखा और पास आकर पूछने लगा कि मामा मछलियों का शिकार क्यों नहीं कर रहे हो ? यदि आप मछलियां का शिकार नहीं करोगे तो फिर  खाओगे क्या ?

बगुले ने जोर की हिचकी ली और रोते हुए बोला की बहुत हो गया मछलियों का शिकार ,अब मैं कोई शिकार नहीं करूंगा मेरी आत्मा जाग गई है अब मैं धर्म-कर्म के कार्य करूंगा देखो अब मैं पास आई हुई मछलियों का भी शिकार नहीं कर रहा हूं तुम तो देख ही रहे हो

केकड़ा बोला मामा शिकार नहीं करोगे ,कुछ खाओगे नहीं तो “आप मर नहीं जाओगे” ?   बगुले में एक और हिचकी लेते हुए कहा कि ऐसे जीवन को नष्ट हो जाना ही अच्छा है बेटा वैसे भी हम सभी को अब जल्दी मरना भी है मुझे ज्ञात हुआ है कि यहां पर  बारह वर्ष लंबा सूखा पड़ेगा 

बगुला भगत
बगुला भगत

बगुले ने  केकड़े से कहा कि  यह बात उसे एक महात्मा ने बताई है जिस की भविष्यवाणी कभी गलत सिद्ध नहीं  होती अब केकड़े नहीं है बात तालाब में रहने वाले सभी जीव  जंतु को बताई की बगुला कैसे प्रभु भक्ति में लग गया है और उसने शिकार करना छोड़ दिया ,शीघ्र ही सूखा पड़ने वाला है  जिससे तालाब का पानी सूख जाएगा  जिसे सुनकर सभी  जीव बहुत दुखी  हो गए

 

वह सब मिलकर बगुले के पास गए और बोले भगत मामा आप तो सब कुछ जानते हो आप ही हमें इस घोर विपत्ति से बाहर निकाल सकते हो

 

यह सुनकर बगुला मन ही मन मुस्कुरा और बोला अब मेरा यह जीवन दूसरों की सेवा में व्यतीत होगा

उसने बताया कि पास में ही  कुछ मील दूर एक बड़ा तालाब है जिसमें झरने से  निरंतर पानी गिरता रहता है वह कभी सूखता नहीं है

 

बगुले की बात सुनकर मछली  बोली लेकिन भगत मामा हम  वहां पहुंचेंगे कैसे?    बगुला बोला मैं तुम सभी को एक-एक करके अपनी पीठ पर बैठा कर  वहां पर छोड़ आऊंगा

 

अब बगुला रोजाना एक प्राणी को अपनी पीठ पर  बैठा  कर उड़ जाता और कुछ दूर चक्कर लगाकर एक पत्थर की शिला पर उसको पटक कर मार देता और खा लेता कभी-कभी बगुले का मन होता तो वह दिन में दो चक्कर भी लगा लेता 

धीरे धीरे तालाब से जीव जंतु की संख्या कम होने लगी और चट्टान पर हड्डियों का ढेर बढ़ने लगा

इस तरह बगुले का जीवन आराम से बीतने लगा अब वह काफी ताकतवर हो गया उसका चेहरे पर लाली आ गई 

एक दिन केकड़ा बोला भगत मामा  मेरा नंबर कब आएगा?

आप सभी दूसरे जीव जंतुओं को तालाब में छोड़ आए हो और मैं कब से आपकी राह देख रहा हूं बगुला मुस्कुराया और बोला बेटा आज तेरा ही नंबर है उन्होंने अपने को अपने पीठ पर बैठाया और दो चार चक्कर चट्टान के  ऊपर से लगाए तो  केकड़े ने नीचे  झांक कर   देखा कि चट्टान पर हड्डियों का ढेर लगा हुआ है

वह समझ गया कि हमारे तालाब के सभी जीव जंतुओं को इस बगुले ने खा लिया है तभी तो यह इतना तगड़ा हो गया है केकड़ा बोला भगत मामा यह चट्टान पर हड्डियों का ढेर कैसा है बुगला मुस्कुराया  और बोला  की बेटा “मैं सभी जीव जंतुओं को यहीं पर लाकर खाता हूं”

अब मैं तुम्हें भी चट्टान पर मार कर खा लूंगा मेरी यह सभी बातें झूठी है ना कोई वहां पर तालाब है और ना ही किसी महात्मा ने मुझे भविष्यवाणी बताई थी यह सब तो मेरी प्लान है अब बगुला इससे पहले कि केकड़े को चट्टान पर पटकता केकड़े ने बगुले की गर्दन को जोर से पकड़ लिया और तब तक जकड़ कर रखा जब तक कि बगुला मर नहीं गया फिर केकड़ा बगुले की कटी गर्दन लेकर  तालाब पर वापस आया और बचे हुए सभी प्राणियों को पूरा किस्सा सुनाया

बगुला भगत/Bagula Bhagat-Panchtantra/2020

(बगुला भगत)कहानी से शिक्षा:-

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी आंख बंद करके किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिए हमें पूरी बात का पता लगाना चाहिए और आप कार्य करना चाहिए

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