हार की जीत/Panchtantra/hindi Kahaniya/2020

हार की जीत/Panchtantra/hindi Kahaniya/2020

 

हार की जीत/Panchtantra/hindi Kahaniya

पुराने समय की बात है एक गांव में एक बाबा रहते थे ।जिनका नाम भारती  था। पहले उनके पास धन दौलत और सभी संसाधन थे। लेकिन उन्होंने भगवान की भक्ति के लिए सभी कुछ त्याग दिया था। लेकिन उनके पास एक घोड़ा था । जो बहुत सुंदर और बलवान था। वह उसका मोह  नहीं छोड़ सके। उनका सोचना था कि वह उसके बिना नहीं रह पाएंगे।  बाबा प्रतिदिन घोड़े पर बैठकर संध्या के समय  8 से 10 मील का चक्कर लगाते थे । वह गांव के बाहर एक छोटे से मंदिर में रहते थे और प्रभु भजन गाते थे उन्होंने अपने घोड़े का नाम सुल्तान रखा हुआ था । बाबा भारती घोड़े की चाल पर ऐसे मोहित थे जैसे मां अपने बेटे पर होती है। वह कहते थे कि सुल्तान ऐसे चलता है कि जैसे घटा देखकर मोर नाचता है।उस इलाके में एक प्रसिद्ध डाकू भी रहता था। जिसका नाम खड़क सिंह था ।लोग खड़क सिंह का नाम सुनकर ही डर जाते थे । धीरे धीरे सुल्तान की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि यह बात डाकू खड़क सिंह के कानों तक भी पहुंच गईखड़क सिंह सुल्तान को  देखने के लिए  अधीर हो गया।एक दिन वह बाबा भारती से मिलने उनकी कुटिया पर पहुंचा।

हार की जीत/Panchtantra/hindi Kahaniya

बाबा भारती ने पूछा खड़क सिंह आपका क्या हाल हैं ।खड़क सिंह ने सिर झुका कर बाबा को प्रणाम किया बाबा ने उनका हालचाल पूछा और बोले कि तुम इधर आज कैसे आ गए हो । तब खड़क सिंह ने बताया बाबा मुझे यहां सुल्तान की चाह खींच लाई है । अब बाबा ने सुल्तान की प्रशंसा करनी शुरू कर दी वह बोले कि यह बड़ा विचित्र जानवर है तुम अगर इसको देखोगे तो खुश हो जाओगे। उसकी चाल तुम्हारा मन मोह लेगी ।बाबा भारती खड़क सिंह को लेकर घोड़े के अस्तबल में पहुंचे । बाबा ने बड़े गर्व से घोड़ा दिखाया तो खड़क सिंह के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उसने  हजारों घोड़े देखे थे किंतु सुल्तान जैसा सुंदर और बलवान घोड़ा उसने कभी नहीं देखा।

सुल्तान ने मन ही मन  सोचा ऐसा घोड़ा तो मेरे पास होना चाहिए। इस साधु को इन सब वस्तुओं से क्या लाभ है।

खड़क सिंह ने  बाबा से घोड़े की चाल देखने की इच्छा  व्यक्त की । बाबा जी  भी खड़क  सिंह के मुंह से घोड़े की प्रशंसा सुनकर गदगद हो गए।  वे घोड़ा खोलकर बाहर लाए और उसकी पीठ पर बैठ गए। बाबा के बैठते ही घोड़ा वायु की गति से चल पड़ा । उसकी चाल देख कर खड़क सिंह के हृदय पर सांप लोट गया।

अब तो खड़क सिंह का हाल बेहाल हो गया । वह घोड़े को पालने के लिए मचल गया ।  उसने कहा बाबाजी आप का घोड़ा मुझे पसंद है अब मैं  आपके पास है यह घोड़ा नहीं रहने दूंगा ।

बाबा भारती डाकू की बात से डर गए। अब उन्हें रात को नींद आने बंद हो गई । वह रात दिन घोड़े के बारे में सोचते रहते थे । फिर बाबा जी ने योजना बनाई और उन्होंने रात भर जागकर घोड़े का पहरा देना शुरू कर दिया। कई महीने बीत गए लेकिन डाकू वापस नहीं आया तो बाबाजी  लापरवाह हो गए ।  उन्हें डाकू की बात झूठी लगी 1 दिन संध्या का समय था। बाबाजी सुल्तान की पीठ पर बैठकर टहलने जा रहे थे कि पीछे से आवाज आई ओ बाबा जी इस  अपाहिज की बात भी सुनते जाओ  बाबा जी ने पीछे देखा तो देखा कि एक व्यक्ति वृक्ष की छाया में पड़ा है और करा रहा है उसको सहायता की आवश्यकता है। बाबा भारती ने कहा  तुम्हें क्या कष्ट है ।तब उसने कहा बाबाजी मुझे यहां से 3 किलोमीटर दूर रामा वाला जाना है। आप मुझे घोड़े पर बैठा लो भगवान आपका भला करेगा । बाबा जी ने पूछा वहां आपका कौन है ?  इस पर डाकू ने एक  वैद्य के बारे में बताएं और कहा कि मैं उनका सौतेला भाई बाबा भारती ने घोड़े से उतर कर उस अपाहिज को घोड़े पर बैठा लिया और अपने आप घोड़े की लगाम पकड़कर पैदल पैदल चलने लगे। सहसा उनको एक झटका सा लगा और  लगाम उनके हाथ से छूट गई बाबा ने देखा कि अपाहिज घोड़े की पीठ पर तन कर बैठा हुआ है । वह घोड़े को  दौड़ाकर ले जाने लगा बाबा ने जोर से चिल्ला कर बोले खड़क सिंह ठहर जाओ खड़क सिंह ने आवाज सुनकर घोड़ा  रोक लिया । बाबा जी ने कहा मैं यह घोड़ा अब नहीं लूंगा लेकिन तुम मेरी एक बात सुनते जाओ। बाबा ने  कहा यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है खड़क सिंह ने कहा बाबा जी आदेश कीजिए मैं आपका सेवक हूं बस यह घोड़ा नहीं दूंगा ।  बाबा जी ने घोड़े की तरफ देखा तक नहीं और  खड़क सिंह से कहा तुम यह घटना किसी को भी मत बताना । खड़क सिंह बार-बार इस बात के बारे में सोचता रहा कि इस घटना को बताने में बाबा जी को क्या  डर है? लेकिन  खड़क सिंह के समझ में कुछ भी नहीं आया तब उसने पूछा बाबाजी यह घटना बताने में क्या हर्ज है ?

बाबा भारती बोले खड़क सिंह यदि तुम यह घटना सभी को बता दोगे तो कोई भी गरीबों की सहायता नहीं करेगा उनका गरीबों के ऊपर से विश्वास उठ जाएगा खड़क सिंह घोड़ा लेकर चला गया लेकिन यह बात बार-बार उसके मन में आती रही की बाबा जी को यह घोड़ा कितना प्यारा था वह कहते थे।  इसके बिना नहीं रह पाएंगे  लेकिन गरीबों ऐसा है कि सहायता के लिए उन्होंने इसके तरफ से मुंह मोड़ लिया और यह घटना बताने के लिए भी मना कर दिया ।  एक दिन खड़क सिंह घोड़ा लेकर आया  और उसेबाबाजी के अस्तबल में बांध आया । सुबह जब जल्दी उठकर बाबा जी ने स्नान किया तब वह अस्तबल की ओर देखा तो वहां पर घोड़ा बंधा हुआ है । उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और  वह घोड़े की गर्दन से लिपट गए।  इस तरह बाबा जी हार कर भी जीत गए।

हार की जीत/Panchtantra/hindi Kahaniya

कहानी से शिक्षा

 इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें  कभी भी अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए इस प्रकार का उदाहरण  पेश नहीं करना चाहिए जिससे कि समाज को गलत संदेश जाएगा ।

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