Rabbit and Turtle race story (खरगोश और कछुआ)

तीतर और खरगोश /Panchtantra/Hindi Kahaniya/2020

 

 

 

 

 

तीतर और खरगोश /Panchtantra/Hindi Kahaniya/

बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में एक बहुत पेड़ के तने में एक खोल था। उस  खोल में तीतर रहता था ।वह प्रतिदिन भोजन की तलाश में  इधर उधर  जंगल में जाया करता था।एक दिन  खाना ढूंढते ढूंढते दूर किसी खेत में निकल गया । तीतर ने सोचा कि वह खाने के लिए इधर-उधर भटकता रहता है। और अभी इस खेत में काफी मात्रा में चावल है ।वह ऐसा करता है कि कुछ दिन इसी खेत में रुक  जाएगा। और बाद में वह अपने घर को लौट जाएगा।

उधर जब तीतर अपने घर मैं नहीं लौटा तो एक खरगोश ने  उसमें रहना शुरू कर दिया ।एक महीने बाद जब  तीतर लौट कर अपने घर आया तो उसने देखा कि एक खरगोश ने उसके घर पर अवैध कब्जा कर लिया है। यह सब देखकर  तीतर को बड़ा क्रोध आया और उसने खरगोश को घर खाली करने के लिए बोला और उसे समझाया कि यह मेरा घर है और कुछ दिन के लिए मैं भोजन की तलाश में अपने घर नहीं लौट पाया था ।

तीतर को अपने ऊपर चिल्लाते हुए  देखकर खरगोश को भी गुस्सा आ गया । खरगोश बोला “कौन सा घर”,  “किसका घर “ जंगल का  एक ही नियम है कि  जो जहां रह रहा है वही उसका घर है । तुम यहां रहते थे अब यहां मैं रहता हूं इसलिए यह मेरा घर है ।इस तरह दोनों के बीच तू तू मैं मैं हो गई । तीतर बार-बार खरगोश को घर से बाहर करने की धमकी  देता। उधर खरगोश भी अपनी बात से टस से मस नहीं हुआ । खरगोश ने कहा कि इस बात का फैसला हम किसी तीसरे से करवाते हैं ।

अतः हमें जंगल के किसी दूसरे जानवर के पास न्याय मांगना होगा । दोनों की लड़ाई को बिल्ली दूर से देख रही थी ।  जंगली बिल्ली मन ही मन  मुस्कुराने लगी उसने सोचा कि यदि यह दोनों मेरे पास आ जाए तो मैं इन दोनों का शिकार आराम से कर लूंगी ।

तीतर और खरगोश /Panchtantra/Hindi Kahaniya/

खरगोश और तीतर को अपनी ओर आते देख बिल्ली ने आंखें बंद कर ली। उसके हाथ में एक माला थी ।वह माला जपने  का ढोंग करने लगी । उन दोनों ने सोचा कि  यह बिल्ली तो बड़ी ही धर्मात्मा है।  इसने तो शिकार छोड़कर भगवान का नाम जपने शुरू कर दिया है ।अतः इसके पास जाने में हमें कोई भी खतरा नहीं है ।

तीतर और खरगोश दोनों बिल्ली के पास पहुंच गए और जाकर उनसे न्याय के लिए प्रार्थना करने लगे।  बिल्ली बोली बच्चों मेरे पास आकर बैठो मुझे अपनी बात बताओ मैं अब बूढी हो गई हूं। इतनी दूर से मुझे कुछ दिखाई नहीं देता है और ना ही कुछ सुनाई देता है। खरगोश और तीतर दोनों ही  बिल्ली के पास जाकर बैठ जाते हैं । बिल्ली एकदम से दोनों पर झपट्टा मारकर दोनों को मार देती है।

 

(तीतर और खरगोश /Panchtantra/Hindi Kahaniya)कहानी से शिक्षा

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी आपस में लड़कर अपने शत्रु के नहीं जाना चाहिए नहीं तो शत्रु आपस की लड़ाई का फायदा उठाकर हमारा नुकसान कर सकता है।

बगुला भगत/Bagula Bhagat-Panchtantra/2020

एक जंगल में बहुत विशाल तालाब  था  जो पानी से हमेशा भरा रहता था   इसमें हर प्रकार के जीवों के लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध थी  उसने अनेक प्रकार के जीव जंतु मछलियां पक्षी कछुए और केकड़े रहते थे  तालाब के पास में ही एक बगुला रहता था जो बहुत आलसी  स्वभाव का था  परिश्रम करना उसको बिल्कुल भी पसंद नहीं था वह अक्सर भूखा ही रहता था  जिसके कारण उसका शरीर भी कमजोर हो गया था मछली पकड़ने में तो मेहनत लगती है लेकिन वह आलसी स्वभाव होने के कारण मछली का शिकार नहीं करता था  वह अक्सर इसी सोच विचार में डूबा रहता था कि क्या उपाय किया जाए जिससे उसे बिना मेहनत किए ही स्वादिष्ट भोजन  मिलता रहे एक दिन उसे एक उपाय सोचा और  वह उसे आजमाने बैठ गया। More  read…

 

 

 

 

 

 

 

 

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