शिकारी और कबूतर  /The Hunter and Pigeon /Panchtatra /2020

 

शिकारी और कबूतर  /The Hunter and Pigeon /Panchtatra /2020

पुराने समय की बात है जंगल के पास एक शिकारी रहता था । वह बहुत निर्दई था पक्षियों को मारकर खाना ही उसका काम था। उसके इस पाप कर्म को देखकर उसके परिवार वालों ने उसका  त्याग कर दिया था। अब वह अकेला ही रहता था । वह हाथ में  जाल और अपनी लाठी लेकर जंगल में घूमता रहता  था।

एक दिन उसके जाल में एक कबूतरी फस गई । कबूतरी ने निकलने का बहुत प्रयास किया। लेकिन वह सफल नहीं हो सकी  । जब शिकारी कबूतरी  को लेकर अपने घर की ओर चल दिया तब रास्ते में  मूसलाधार वर्षा आरंभ हो गई ।  सर्दी का मौसम था । शिकारी ठंड से कांपने लगा ।  शिकारी ने देखा पास में ही पीपल का पेड़ है जिसमें  खोल बना हुआ है ।  शिकारी ने खोल में घुसते हुए कहा जो यहां रहता है मैं उसकी  शरण मैं जाता हूं। इस समय जो मेरी सहायता करेगा  उसका मैं जीवन भर ऋणी रहूंगा। उस  खोल मैं वही कबूतर रहता था जिसकी कबूतरी को शिकारी ने पकड़ा था। कबूतर उस समय पत्नी के वियोग में बहुत तड़प रहा था ।  पति को अपने लिए तड़पता  देखकर कबूतरी समझ गई की उसका पति उसे कितना प्यार करता है । अतः  वह  पति के प्रेम को देखकर  खुश  हो गई।

उसने मन ही मन  कहा “  मेरे धन्य भाग्य हैं जो ऐसा प्रेमी पति मिला है पति का प्रेम  ही पत्नी का जीवन है।

मेरा जीवन सफल हुआ “। यह विचार कर वह अपने पति से बोली

शिकारी और कबूतर  /The Hunter and Pigeon /Panchtatra /2020

पतिदेव इस  शिकारी ने मुझे  बांध लिया है । यह मेरे पुराने कर्मों का फल है। हम अपने कर्मों से ही  दुख भोंगते   हैं। मेरे बंधन की चिंता छोड़ कर आप इस समय अपने शरणागत अतिथि की सेवा करो ।

जो जीव अपने अतिथि की सेवा नहीं  करता उसके सब  अच्छे कर्म अतिथि के साथ चले जाते हैं और पाप कर्म ही रह जाते हैं।

पत्नी की बात सुनकर कबूतर ने शिकारी से कहा आप चिंता मत करें और  इसे अपना ही घर समझें।

कहो मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं।  इस पर शिकारी ने कहा  मैं सर्दी से  बेहाल हो गया हूं । अतः आप सर्दी दूर करने का प्रयास करें। कबूतर ने इधर उधर से लकड़ी  बटोर कर आग जला दी । शिकारी  आग  सेकने लगा अब कबूतर को अतिथि के भोजन की चिंता हुई उसके घोसले में अन्न का एक दाना भी नहीं था । अब कबूतर  सोचने लगा कि वह अतिथि की भूख कैसे मिटाएं ? जब कबूतर को कोई  अन्य उपाय  दिखाई  नहीं दिया तब उसने अपने शरीर से ही अतिथि की भूख मिटाने का प्रण लिया । वह आग में कूद गया। यह दृश्य देखकर शिकारी का   मन पीड़ा से भर गया ।उसने शिकार न करने का फैसला किया और उसी समय अपना  जाल और लाठी आदि सब तोड़ दिए। कबूतर  को आग में जलता देख कबूतरी का मन पीड़ा से भर गया। उसने कहा मेरा संसार उजड़ गया । पति के बिना पत्नी का जीवन  व्यर्थ होता है । उसने कहा  जब मेरा पति ही जीवित नहीं रहा तो वह जीवित रह कर क्या करेगी । कबूतरी बोली कि मैं भी अपने पति  के अतिथि सत्कार मैं उनकी सहायता करूंगी । अतः कबूतरी भी आग में कूद गई। उसी समय आकाश से पुष्प वर्षा हुई।

शिकारी और कबूतर कहानी से शिक्षा (शिकारी और कबूतर  /The Hunter and Pigeon /Panchtatra /2020)

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति को अपने जीवन में अतिथि का कभी अनादर नहीं करना चाहिए। हम सभी को अतिथि सत्कार की भावना से प्रेरणा लेनी चाहिए।

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