घमंडी मोर

घमंडी मोर/hindi kahani/panchtantra

घमंडी मोर

जंगल में बहुत सारे पक्षी मिलजुल कर रहते थे । उस जंगल में बहुत से जानवर भी रहते थे। सभी पक्षियों एवं जानवरों में आपस में बहुत मेलजोल था । इस प्रकार उनका जीवन आरामदायक व्यतीत हो रहा था। वह सभी उस जंगल में अत्यधिक खुश थे । उस जंगल में मिट्ठू नाम का एक मोर रहता था । वह अपने आप को अत्यधिक सुंदर समझदार समझता था । उसे अपनी नीली गर्दन व लंबे-लंबे पंखों पर अधिक घमंड था । वह सोचता था कि इस पूरे जंगल में वह सबसे सुंदर है। वह प्रतिदिन सभी जानवरों को अपनी खासियत बताता रहता था। सभी जानवर उसकी बात पर ध्यान नहीं देते थे और उसे पागल समझ कर उसकी बात को टाल देते थे । एक दिन बहुत तेज आंधी आई और बादल भी छा गए । इसलिए सभी पक्षी आकर अपने  घोंसले में बैठ गए। परंतु मोर को तो बारिश में अधिक मजा आ रहा था । वह पंख फैलाकर नाचने लगा, नाचते-नाचते  वह  चिड़िया के पास गया और कहने लगा देखो बहन कितना अच्छा मौसम हो रहा है । तुम भी मेरे साथ पंख फैलाकर नाचो । चिड़िया ने कहा भाई मुझे नाचना नहीं आता है तो तुम मुझे क्यों परेशान कर रहे हो मोर बोला इस पूरे जंगल में मेरे सिवा और किसी पर नाचना आता है क्या। इतना कहकर  वह पेड़ पर बैठे एक तोते के पास गया और कहने लगा आओ तोते भाई मेरे साथ आकर नाचो तोते ने कहा भाई मुझे बहुत ठंड लग रही है । मोर बोला जब नाचना ही नहीं आता तो झूठ क्यों बोल  रहे हो तोते ने गुस्से में कहा हां भैया तुम ही पूरे जंगल में सर्वगुण संपन्न हो । इतना सुनकर मोर आगे एक हंस के पास जाता है और कहता है कि तुम मुझे इस जंगल के पक्षी नहीं दिखाई दे रहे हो ।  हंस ने कहा बारिश की वजह से मैं यहां पर विश्राम कर रहा हूं।  मैं इस जंगल का पक्षी नहीं हूं।  मोर ने कहा आओ तुम मेरे साथ आकर नाचो हंस बोला भैया मुझे आराम करने दो मैं अधिक थका हुआ हूं।  मोर ने कहा सीधे-सीधे बोल दो कि तुम्हें नाचना नहीं आता है।  डीगे क्यों मार रहे हो।  हंस ने मन ही मन सोचा कि यह तो मेरा अपमान कर रहा है मुझे इसे मजा चखाना चाहिए। हंस ने मोर से कहा कि तुम मेरे साथ  आसमान में उड़ो देखते हैं कि ज्यादा ऊंचाई तक और देर तक कौन उड़ता है । इतना कहकर हंस उड़ गया ।  मोर भी उसके पीछे पीछे उड़ने लगा हंस  बहुत अधिक ऊंचाई तक उड़ता रहा । परंतु बारिश की वजह से मोर के पंख गीले हो गए और  वह अधिक नहीं उड़ सकता था । मोर नीचे उतर गया।  हंस भी नीचे आ गया। हंस ने मोर से कहा तुम मेरे समान अधिक ऊंचाई तक नहीं उड़ सकते हो।  यह सुनकर मोर को अपनी गलती का एहसास हो गया । मोर ने हमसे अपनी गलती की माफी मांगी और कहा आज के बाद वह अपनी तुलना किसी के साथ नहीं करेगा । हंस ने उसे माफ कर दिया हंस बोला मोर मैं आज तुम्हें एक सलाह देता हूं तुम भूल कर भी कभी किसी के साथ अपनी तुलना नहीं करोगे क्योंकि इस संसार में सभी व्यक्तियों में एक समान  गुण नहीं होते हैं। सभी पशु पक्षी अलग-अलग होते हैं। किसी का रंग अलग होता है तो किसी का आकार । इस प्रकार किसी की तुलना दूसरों के साथ कभी नहीं करनी चाहिए ।

शिक्षा किसी को भी कभी अपनी सुंदरता वह अपने गुणों पर घमंड नहीं करना चाहिए ।

please read…

उड़ने वाला कछुआ

एक जंगल में  तीन मित्र रहते थे । जिसमें एक कछुआ और दो  हंस  थे। उनकी आपस में गहरी दोस्ती थी । वे तीनों मिलकर दिनभर खूब मस्ती करते थे। शाम होते ही अपने अपने घर चले जाते थे। कछुआ तालाब में रहता था। जबकि हंस तालाब के किनारे पर रहते थे। एक बार जंगल में सूखा पड़ गया ।दूर-दूर तक कोई वर्षा नहीं हुई । अब जंगल के सभी जीव तालाब का पानी पीने लगे जिससे कि वह तालाब भी सूखने लगा । अब  हंसों ने दूसरे जंगल में ……

घमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोरघमंडी मोर

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Twitter
Instagram